Aao Fir Se Diya Jalaye Poem Lyrics By Atal Bihari Vajpayee

Hear’s a Most Beautiful poem Lyrics of भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी आओ “फिर से दिया जलाएँ” (हिंदी कविता).

Aao Fir Se Diya Jalaye

Credits –

Song – Aao Fir Se Diya Jalaye

Artist – Atal Bihari Vajpayee

 

aao fir se diya jalaye poem lyrics

                                                                                                        aao fir se diya jalaye

Aao Fir Se Diya Jalaye Poem Lyrics

आओ फिर से दिया जलाएँ
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ

हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने-
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ

Video Song of The Poem

About The Poet Or Atal Bihari Vajpayee

Atal Bihari Vajpayee was an Indian politician, statesman and poet. He served three terms as the Prime Minister of India.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *