Baith Jata Hu Mitti Pe Aksar Lyrics – Poem Lyrics

Here Is Greatest of All Time Poem Baith Jata Hu Mitti Pe Aksar Lyrics.

Baith Jata Hu Mitti Pe Aksar

Credits –

Poem – Baith Jata Hu Mitti Pe Aksar

Writer – Harivansh Rai Bachchan

Baith Jata Hu Mitti Pe Aksar Lyrics - Poem Lyrics

                                                           Poem Lyrics

Baith Jata Hu Mitti Pe Aksar Lyrics

बैठ जाता हूँ मिट्टी पे अक्सर
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना।

ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है
पर सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है
जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्योंकि
एक मुद्दत से मैंने न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले।

एक घड़ी ख़रीदकर हाथ में क्या बाँध ली,
वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे।

सोचा था घर बना कर बैठूँगा सुकून से
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला।
सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब,
बचपन वाला ‘इतवार’ अब नहीं आता।

शौक तो माँ-बाप के पैसों से पूरे होते हैं,
अपने पैसों से तो बस ज़रूरतें ही पूरी हो पाती हैं।

जीवन की भाग-दौड़ में;
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है ?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है।
एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम,
और
आज कई बार बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है।
कितने दूर निकल गए रिश्तों को निभाते निभाते
खुद को खो दिया हमने अपनों को पाते पाते।

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